अब लितानी नदी तक इजरायल का कब्जा, नेतन्याहू ने बदल दिया मिडिल ईस्ट का नक्शा

यरुशलम

इजरायल- ईरान महायुद्ध अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां से मिडिल-ईस्ट का नक्शा हमेशा के लिए बदलता हुआ दिख रहा है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने  एक ऐसा ऐलान कर दिया है जिसने तेहरान से लेकर बेरूत तक खलबली मचा दी है. नेतन्याहू ने इजरायली सेना को हुक्म दिया है कि वह लेबनान के अंदर घुसकर ‘लितानी नदी’ तक एक अभेद्य बफर जोन यानी सुरक्षा घेरा तैयार करे. इजरायल अब पीछे हटने के मूड में नहीं है, बल्कि वह दुश्मन के घर में घुसकर कब्जा जमा रहा है ताकि भविष्य में कोई भी इजरायल की उत्तरी सीमा की तरफ आंख उठाकर न देख सके। 

नेतन्याहू के इस एक फैसले से सबसे ज्यादा पसीना ईरान को आ रहा होगा. ईरान की पूरी रणनीति अपने प्रॉक्सी के दम पर चलती है और लेबनान में हिजबुल्लाह उसका सबसे बड़ा और खूंखार मोहरा रहा है. लितानी नदी के दक्षिण का यही वह इलाका है जहां हिजबुल्लाह के लड़ाके अपनी सुरंगें बनाकर, जंगलों में छिपकर और बंकर बनाकर बैठे थे. दशकों से वे इसी इलाके का इस्तेमाल इजरायल के शहरों पर रॉकेट, एंटी-टैंक मिसाइलें और ड्रोन दागने के लिए लॉन्चिंग पैड की तरह करते आ रहे थे। 

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हमले की जगह नहीं बचेगी
अब जब इजरायली सेना खुद लितानी नदी तक के इलाके को अपने कब्जे में लेकर वहां एक खाली बफर जोन बना देगी, तो हिजबुल्लाह के पास इजरायल पर हमला करने के लिए कोई जगह ही नहीं बचेगी. ईरान ने हिजबुल्लाह को खड़ा करने में जो अरबों डॉलर और दशकों की मेहनत लगाई थी, वह इस एक फैसले से मिट्टी में मिल जाएगी. ईरान के लिए यह एक बहुत बड़ा रणनीतिक झटका है क्योंकि उसका सबसे ताकतवर हथियार अब इजरायल की पहुंच से बहुत दूर धकेल दिया जाएगा। 

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आखिर क्या है यह लितानी नदी और इसका महत्व?
लितानी नदी दक्षिणी लेबनान के भूगोल की एक बेहद अहम लकीर है. यह नदी इजरायल की उत्तरी सीमा से लगभग 30 किलोमीटर अंदर लेबनान में बहती है. रणनीतिक रूप से यह एक प्राकृतिक सीमा का काम करती है. साल 2006 में जब इजरायल और हिजबुल्लाह का युद्ध हुआ था, तब संयुक्त राष्ट्र ने भी एक प्रस्ताव पास करके कहा था कि हिजबुल्लाह के लड़ाकों को लितानी नदी के उस पार ही रहना चाहिए और इस 30 किलोमीटर के इलाके में कोई हथियारबंद गुट नहीं होना चाहिए. लेकिन हिजबुल्लाह ने कभी इसे नहीं माना. अब इजरायल ने तय किया है कि वह किसी अंतरराष्ट्रीय समझौते का इंतजार नहीं करेगा, बल्कि अपनी सेना के दम पर खुद इस इलाके को खाली करवाकर वहां अपना सुरक्षा घेरा बनाएगा। 

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‘हम दुश्मन के इलाके में घुसकर बैठे हैं’
बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा कि इजरायल ने आस-पास के देशों के साथ युद्ध की अपनी पूरी नीति और सोच को बदल दिया है. नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने पहले ही वादा किया था कि वो मिडिल-ईस्ट का चेहरा बदल देंगे, और उन्होंने ऐसा कर दिखाया है. नेतन्याहू ने बताया कि इजरायल ने अब दुश्मन के इलाके के बहुत अंदर तक तीन बड़े बफर जोन बना लिए हैं. पहला गाजा में, दूसरा लेबनान में और तीसरा सीरिया में. उनका संदेश साफ था कि इजरायल अब अपनी सीमाओं के अंदर बैठकर हमलों का इंतजार नहीं करेगा. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अब दुश्मन उन्हें नहीं चौंकाते, बल्कि इजरायल उन्हें चौंकाता है. इजरायल अब इस युद्ध में पूरी तरह से हमलावर है और दुश्मन के इलाके के बहुत अंदर तक पहुंच चुका है। 

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